भोर का सूरज है।
By Raj
भोर का सूरज है।
रोके नही रुकेगा।
कहीं दूर का ये सूरज है।
छुपाये नहीं छुपेगा।
हल्का सा आँगन ठंडा तो है।
कुछ देर की बात है।
ये भी ठंडा नहीं रहेगा।
सौंधी सी महक है हर जगह।
नन्हे पैर स्कूल की ओर चल दिए।
कहीं मेहनत शोर कर रही है।
कहीं आलस आँख मूंदे पड़ा है।
कुदरत का पहिया है।
चल पड़ा है ये किसी की नही सुनेगा।
कहीं चूड़ियाँ आवाज़ कर रही है।
कहीं मेहंदी की महक वाली रोटी पक रही है।
ऊँचाई लिए उड़ रहा है पंछी,
रोके न रुकेगा।
By Raj

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