भूखी-प्यासी
- Hashtag Kalakar
- 1 hour ago
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By Sangeeta Singh
मैं भूखी-प्यासी,
ख्वाब नहीं बेतहाशा,
सिमट-सिकुड़कर विलीन हो रही हूँ
इस धरामंडल में ।
आस मेरा रास नहीं,
रंग-रलिया में स्वास नहीं,
शेष बचेगें अस्थि-काया,
कौन लाएगा आशाओं का अमृत?
ऐसा कोई दूत नहीं ।
सिमट रही है परिधि मेरी,
मैं भूखी-प्यासी ।
By Sangeeta Singh

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