भुखमरी
By Dr. Suboohi Jafar
बस एक उम्मीद पे जिन्दगी की गाड़ी चल रही है,
हर सुबह काम की तलाश जारी है,
लगता नहीं कि आज भी दो रोटी मिल पाएगी,
दिल में यही डर है, और निराशा बढ़ती जा रही है।
समझ नहीं आता, क्या ज़्यादा घातक है,
ये महामारी, जो 2 वर्षों से पाँव पसारे है,
या फिर ये भुखमरी, जो पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है,
कठोर परिश्रम के पश्चात भी जूठन और अश्रु जिनकी नियति है।
जो हर दिन दो वक़्त की रोटी की ख़ातिर संघर्षरत है,
जिनका उदर हर दिन भूख से तड़पकर सिकुड़ता जा रहा है,
बदक़िस्मती और लाचारी जिनका पीछा नहीं छोड़ रही है,
जिनको जीवित रहने जितना भोजन भी उपलब्ध नहीं है।
इस वर्ष, भुखमरी में भारत 107वें पायदान पे है,
जिसका सीधा संबंध बढ़ती जनसंख्या से है,
5 वर्ष से छोटे बच्चों को नहीं मिल रहा पूरा पोषण,
जिसका नतीजा प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण और अकाल मृत्यु है।
आओ सब मिल कर शपथ लें, पूरी कोशिश करने की,
भारत माता के माथे से भुखमरी का नाम मिटाने की,
भुखमरी की इस भीषण ज्वाला को जड़ से शांत करने की,
जिसके लिए आवश्यक है, साक्षरता घर-घर पहुँचाने की।
यदि देश का हर बच्चा साक्षर और जागरुक होगा,
वह सरकार की नीतियों को समझ कर लाभान्वित हो सकेगा,
अपनी और अपने परिवार की उन्नति का स्रोत बनेगा,
संपूर्ण विश्व में भारत का नाम रौशन करेगा।
By Dr. Suboohi Jafar

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