भीड़ में अकेला एक इंसान
Updated: Jul 24, 2025
By Anubha Sinha
भीड़ में अकेला एक इंसान
ढूंढ रहा है, रिश्तों की बुनियाद
जहां बनाया महलें
दे कर सारा प्यार
टूट रहा है, मिट रहा है
वो सारा हार संसार
कौन जहां से लाए वो
ऐसी ईंट की बुनियाद
खड़ी रहे जिसके दम पर
शांति, अमन का जहां
जो ख्वाब उसने देखा
निशा उसमें चलती रही
जो सच उसने समझा
संध्या उसमें बसती गई
कहीं नहीं था, सूर्य का तेज
कहीं नहीं थी, चांद सी शीतलता
बना वो घर उसके बिना
पर टूटा वो उसके यहां
जिसे समझा वो प्रेम का धागा
वो तो था एक छल का जाला
फिर भी चला भीड़ में
ढूंढने वो एक माला
बन पाए पुनः जिससे
रिश्तों का अटूट सहारा
By Anubha Sinha

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