भारतीय सैनिक
By Tara Chand Saini
शून्य डिग्री तापमान में ठंडी ठंडी बर्फ में भी वे उसको तपा देने वाली गर्मी अपने शरीर मे रखते है
उच्चतम तापमान में तीव्र गर्मी वाले रेगिस्तान में भी, वे उसको जमा देने वाली ठंड अपने शरीर में रखते है
जीवन की कठिनतम चुनोतियों में भी घिरे रहकर भी डटे रहते है वे प्रकृति के दुर्गम जगहों में भी मुस्तेदी से खड़े दिन-रात रहते है
महीनों अपने परिवार से दूर रहकर भी करोड़ों परिवारों की रक्षा करते है वे थोड़ी सी नींद लेकर भी सीमा पर रक्षक बनकर पहरा देते है
किसी के भय से भी नही डरते दुश्मनों के हमलों से क्या डरेंगे? वे मज़बूत इरादों वाले कभी पीछे हटा नही करते है
गोला बारूदों के ढेर में रहने वाले दुश्मन की गोली से क्या डरेंगे? वे दुश्मन के छक्के छूटा देने वाले प्रतिपल जान हथेली पे रखते है
दुश्मन कहर बर्फाने को उनकी एक ललकार ही काफी है वे वतन की रक्षा करने वाले अपने दिल मे इरादे बुलन्द रखते है
आबरू की बात है वतन के वास्ते दुश्मन प्रहार कर रहा है कायर सा वे रक्त रंजित, भारतीय सैनिक जो जश्न मौत का भी मनाया करते है
मिट्टी इस देश की बड़ी उपजाऊ है वीरों की फसल पैदा कर देती है वे शांति के अग्रदूत होकर भी दिलों में युद्ध की हुंकार भरते है
By Tara Chand Saini

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