भारतवर्ष के राम जगो
By Yogesh Kumar Pradhan
भारतवर्ष के राम जागो
देखो क्या दृश्य विकार हुआ,
ज्योतिर्मय जागती का फिरसे
भाग्य आज अंधकार हुआ।
हे राम जागो, हां तुम
तम ही तो कलयुग के हो राम,
निद्रा त्यागो, हां तुम
पहचानो अपना परम ज्ञान
विभा तुम्ही हो नव प्रभात की,
अरुणिमा जग के ललाट की,
अहंकार से तमलीन जगत को
अश्नी अनघ तेज की दो तुम,
तिमिरपूर्ण जागती को फिरसे,
ज्योतिपूर्ण करो तुम।
हे भारतवर्ष के राम जगो
हे भारत की संतान जगो।
By Yogesh Kumar Pradhan

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