बेहतरीन
By Karuna Puran
बेहतर भी न थे तुमसे मिलने से पहले
तुमसे मिलकर मगर हम बेहतरीन हो गए
यूँ तो ना जाने खूबसूरती के क्या पैमाने हैं
तेरी नजरों ने जो तराशा हम हसीन हो गए
न हुनरमंद न अक्लमंद न होशियार थे हम
पाकर तुम्हारी सोहबत हम फ़हीम हो गए
पता नहीं हम जैसे हैं वैसे क्यूँ हैं
ऐसा लगता था हमें कब से, अब लगता है ऊपरवाले की कारीगरी महीन हो गए
उड़ते फिरते थे किस गुमान में ना जाने
तेरे हुए जब से, तब से हम ज़मीन हो गए
इस जहाँ में इमान, सच्चाई, अच्छाई, खुदाई
सब भ्रम लगते थे पहले, अब यकीन हो गए
न समझा गया हमें किसी लायक न काबिल
तुम जो आए जिंदगी में हम ज़हीन हो गए
हम मशहूर और दिलनशीन हो गए
जब से तुम हमारे हमनशीन हो गए।
By Karuna Puran

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