बेरंग
By Swapna Jyoti
नूर ए हुस्न पे इतना गुरूर अच्छा नहीं
खूबसूरत तो वो भी होते हैं
जो होते हैं बेरंग
परखने वाले हम कौन होते हैं?
जब है सब यहां खुदा की बदौलत
शातिर अदाओं का शिकार होने से बेहतर है
ये खालीपन बेरंग।
सूरत तो जज्ब महज़ है
असल में सीरत करती है दिलों पे हुकूमत
हुस्न के कफस में कैद होने से बेहतर है
सादगी भरा सूफीपन।
चेहरे की चमक बढ़ा के क्या मिलेगा?
जब रह जाएंगे काले अंदर से मन
दिखावे की खूबसूरती में वो बात कहां
जो कर दे किसी के कुर्बत।
किराए की चीज से बढ़ सकती है कीमत
बढ़ती नहीं कद्र
इन बनावटी रंगों में बदरंग होने से बेहतर है
रहना बेरंग।
By Swapna Jyoti

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