बेबसी
By Rajat Bhadoria
हँसते हो मगर आँखों में नमीं है ना,
ख्वाहिशों को वक़्त की कमी है ना?
आरज़ू और मुक़द्दर मिलते ही नहीं,
जैसे जहान को तुमसे बेरुखी है ना?
कुछ पल सुकूँ के भी तो गवारा नहीं,
हालातों के चलते कैसी बेबसी है ना?
कभी मौका नहीं कभी लफ्ज़ नहीं,
बातें कई दिल में दबी दबी सी हैं ना?
By Rajat Bhadoria

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