बेतहाशा
By Girish Baid
बेचारा, बेसहारा, यह पग चलते चले, बेतहाशा भूख प्यास सब माया है जान जाओ, तोह सत्य निराला है काया कि देन यह नाम और शोहरत बुद्धि विवेक, कि देन हिदायत ना रास्ते लंबी, ना मार्ग छोटी यह माया है, प्रत्येक कि भूमिका छोटी हस्ते खिलखिलाते दुख में कराहते जीवन के नियम, फिरभी समझ ना पाते
आय व्यय स्वयं उच्च ज्ञान है आना जाना ही, जीने का सारांश है जनता कि मोहर आज है सम्मान, हामी ना देते तो मानते अपमान आंखें खोल ज़रा झांको गिरेबान अपने लिए वहाँ, तुम पाओगे एहतराम बेचारा, बेसहारा, यह पग चलते चले, बेतहाशा ।
By Girish Baid

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