बेटी से माँ तक का सफर
Updated: Jul 30, 2025
By Dixit Tarun Shah
बेटी बनकर जन्म लिया,
बहन बनकर बड़ी हुई।
बचपन पूरा गुजर गया,
और शादी कर के बिदा हुई।
नए आंगन में कदम जमाया,
एक नए परिवार की बहु हुई।
पतिव्रता का धर्म निभाया,
और जिम्मेदारियों में डूब गई।
माँ बनकर वंश बढ़ाया,
एक नए दीपक की ज्योत हुई।
जिंदगी के रंगमंच पर,
हर किरदार में तू सफल हुई।
By Dixit Tarun Shah

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