बेटी के प्रति पिता का प्यार
By Rahul Jaiswal
आज फिर एक लिबास सज रहा है
दूल्हा दुल्हन का हो रहा है - दुल्हन दूल्हे की हो रही है,
आज फिर एक बारात सज रहा है,
किसी का आंगन सुना हो रहा है
किसी का आंगन खुशियों की नई दुनिया ला रहा है,
माँ का आँचल सुना हो रहा है
पिता का कंधा डोली से भारी हो रहा है
भाई की कलाई को कोई सुना कर जा रहा है
आज फिर एक दो जीवन जुड़ रहा है,
नए रिश्ते बन रहें है
नई कसमें खाई जा रही है
आज फिर एक बेटी बाबुल का आंगन सुना कर जा रही है,
आज फिर पराये अपने होने जा रहे है,
आज फिर गुड्डा और गुडिये की शादी होने जा रही है,
आज फिर एक बेटी पराई होने जा रही है
आज मेरी गुड़िया की शादी होने जा रही है
By Rahul Jaiswal

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