बेटी की पुकार
By Pooja Mittal
आज सुनाने आई हूँ,
आपको एक सच्चाई I
जिसे सुनकर सबकी,
आँख है भर आई I
जब पैदा हुईं घर में,
माँ बाप ने खुशियां मनाई I
रिश्तेदारों ने कहा लड़की है आई,
जोड़ों इसके लिए पाई पाई I
हुई बड़ी सुन सुन कर,
पराये घर जाना है I
सिखाओ इसको घर के काम,
क्यों ज्यादा पढ़ाना है ?
मम्मी पापा की मदद से,
अच्छे से पढ़ पाई I
अपने पैरों पर खड़े हुई,
अच्छी सी नौकरी थी पाईI
फिर आया वह दिन,
जिस दिन होना था पराई I
माँ पापा का घर छोड़ कर,
ससुराल थी आई I
घर और नौकरी का ताल मेल,
बड़ी मुश्किल से थी बना पाई I
उस पर भी सबसे यही सुना,
पराये घर से है आई I
कभी बच्चो के लिए ,कभी पति के लिए ,
अपनी जिंदगी थी गंवायी I
क्या वो लड़की ?
कभी अपने लिए जी पायी ?
आज सोचती है वो ,
क्या जिंदगी थी उसने पाई ?
मायके में भी और ससुराल में भी ,
रही वो ही पराई I
क्यों हर लड़की होती है ,
जग में पराई ?
जबकि वही है जो धरती पर ,
नया जीवन है लाई I
By Pooja Mittal

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