बुकमार्क
By Nirupama Bissa
ये लोग
खुशियों का उत्सव
चाहें ना मनाए ,
पर
दुख की घड़ियों में
साथ होते हैं ।
किताब ए जिन्दगी से
उकताये हुए हम
जब ,
पन्नों के कान मरोड़कर
किसी कोने में
जिंदगी को
रख दिया करते हैं ।
ये लोग
बुकमार्क की तरह
आते हैं ,
कानों में कह जाते हैं,
चल ना
वहीं से शुरू करते हैं
जहां से
सिरे छूट गए थे ।
चल ना ,
फिर से बुनते
जहां फंदे
उलझ गए थे ।
चल ना ,
मुड़े पन्नों को
खोल दे ,
लगा दे एक
बुकमार्क
और हर बार
करता जा
एक नई शुरुआत।
जी हां जनाब,
ये दोस्त
होते ही ऐसे हैं ,
जैसे
बुकमार्क ।
By Nirupama Bissa

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