बिछड़े हुए सनम से ज़ियादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं
By Manish Joshi
बिछड़े हुए सनम से ज़ियादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं,
पहले प्यार के ग़म से ज़ियादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं।
यूँ तो सनम के हर वादे पर हमको है पूरा यक़ीं,
पर झुकती नज़र की क़सम से ज़ियादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं।
है हक़ीक़त कि वो हैं किसी के है भरम कि वो हैं हमारे,
इश्क़ में ऐसे भरम से ज़ियादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं।
यूँ तो सनम की बाहों में गुज़री हर इक साँस है हसीन,
पर बाहों में निकले दम से ज़ियादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं।
By Manish Joshi

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