बिखरीं हुईं रियासत
By Tejashree Bhanudas Shitole Ranmale
बिखरी हुई रियासत..
आज जैसे कुछ हो रहा हैं
आँसुओंका समंदर बह रहा हैं l
अंदर से कुछ इस तरह से टूट रहा हैं
जैसे गुजरता हुआ हर लम्हा हम पर हँस रहा हैं ll
कभी कभी नाज होता था हमें अपने आप पर
लेक़िन आज अपनी ज़बान के तेज होने का मलाल हो रहा हैं l
सच ही कहा हैं किसीने जितना जरुरी हैं उतनाही
सोच समझ कर बोला कर
अपनी काली ज़बान से बददुआ ना निकाला कर,
कही मुँह से निकली बददुआ सच ना हो जाए ll
फिर पछतावे का झूठा दिखावा भी शायद काम ना आए
दर्द ए दिल की दास्तान भी सुनने
औऱ सुनाने क़ाबिल ना रह जाए l
मत कर इतना गुरुर अपनी बदजुबानी पर
टूट कर बिखरीं पड़ी अपनी मोहब्बत पर ll
ना कोई हैं शिकायत,
ना ही कर पायेंगे कोई भी सियासत l
हम तो हैं बस अपनी ही तक़दीर की
एक बिखरीं पड़ी हुई सी रियासत ll
By Tejashree Bhanudas Shitole Ranmale

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