बाल विवाह
By Dr. Suboohi Jafar
केवल भारत ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व में यह कुरीति है,
साक्षरता के अभाव में, बुज़ुर्गों द्वारा बनाई गई यह नीति है,
समूचे विश्व में बाल विवाह के संदर्भ में भारत की पदवी दूसरी है,
ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रकोप बहुस्तरीय है।
ये ऐसी कुरीति है, जो दो अपरिपक्व लोगों को बंधन में बांध देती है,
अनजान होते हैं दोनों एक दूसरे से, ज़िम्मेदारी की बेड़ियों में जकड़ देती है,
रूढ़िवादिता और अंधविश्वास के कारण यह प्रचलित रहती है,
निम्न आर्थिक स्तिथि और निरक्षरता, इसे बढ़ावा देती हैं।
बाल विवाह को रोकने इतिहास में कई लोग आगे आए,
जिनमें प्रमुख हैं, केशवचंद्र सेन और राजा राममोहन राय,
विशेष विवाह अधिनियम जैसे बिल इन्होंने पास करवाए,
बाल विवाह निरोधक अधिनियम नामक बिल से और सुधार लाए।
बाल विवाह विशेष अधिनियम २००६ आज अस्तित्व में है,
यह आंशिक रूप से नहीं, सख़्ती से लगाता प्रतिबंध है,
यह बाल विवाहित बच्चों को देता विशेषाधिकार है,
वयस्क होने के दो वर्षों के अंदर, बाल विवाह अवैध घोषित कर सकते हैं।
यदि बाल विवाह को जड़ से समाप्त करना है,
तो शिक्षा का प्रसार और समाज को जागरूक करना है,
है यह मातृ और शिशु मृत्यु का कारण, यह सबको समझाना है,
एच•आई•वी• जैसे यौन संक्रमण का ख़तरा ये बढ़वाता है।
न समझो बेटी को बोझ, इन्हें निखरने तो दो,
बगिया की कच्ची बेल हैं, इन्हें परिपक्व होने तो दो,
बाल विवाह कर उनका जीवन न तुम बर्बाद करो,
इस कुरीति को जड़ से मिटाना है, यह कृत्संकल्प करो।
होगा देश का विकास, यदि हर बच्चा साक्षर होगा,
समझ पाएगा वह अपने अधिकार, आर्थिक रूप से भी सक्षम होगा,
प्रिय भारतवर्ष को बाल विवाह नामक अभिशाप से मुक्त कराना होगा,
इसके दुष्परिणामों के विषय में सबको अवगत कराना होगा।
By Dr. Suboohi Jafar

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