बारिश 1
By Anil Kumar
आज
गदराई हुई है धरती
दूर दूर से गंधाती हुई धरती
आज
खुदर बुदर कर रही हैं
तितलियाँ
आज ढह गया है कोई पुराना सीलनों वाला
दीमकों चूहों छिपकिलयों
से भरा मकान
गिर गया है आज
बुढ़े बरगद का बदरंग पीला पत्ता
आज
साफ हो रही धरती
आज नदियों की धार में झर रही है बारिश
आज कूट कूट कर साफ हो रहें हैं
रंगीन कपड़ों का झुंड
और भर गया
गहरे धूसर सूखे गढ़े वाले ताल और तलैया
आज
अपने शहर के ,गावों के छतों दीवारों किवाड़ों पर
हो रही है बारिश और आज
बारिश की ओट में भींग रहे हैं हम।
By Anil Kumar

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