बारिश
By Mohit Kumar
अगर आते हो तुम वहीँ से जहां से मै समझता हू,
और जाते हो वापस उन्ही बदलो में जहा जाने को मै तरसता हू,
हो सके तो छोटा सा एक काम मेरा करना,
अगली बार थोड़ी बारिश साथ ले आना,
अंधेरी सि गलियों मे सिरकते हुए कंधो पे ठोकर लगे और,
बेबस से मन मे सिसकियों कि आहत की दस्तक गूंजे तो,
परसो जो मैने कहा था तुम्से जरा सोच के मुस्कुराना,
और हो सके तो अगली बार थोडी़ बारिश साथ ले आना,
कराहती सर्दियों कि धुप तले जब बोझल मन को सुलझाने बैठो,
उंगलियों से बालों को छेड़ो काभी बाहों को समेंटो,
और लिपटने को जी करे अगर तुम्हारा मझसे तो चलि आना,
और मंजूर हो तो थोड़ी बारिश भि साथ ले आना.
By Mohit Kumar

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