बहारों सी है तू
By Kuldeep Kumar
तपती गर्मी में हल्की फुहारों सी है तू, बिखरी पतझड़ में बहारों सी है तू, अजीब कशमकश में डूबती जिंदगी मेरी, इस मझधार के लिए किनारों सी है तू। तेरे होने के एहसास ने जीना सीखा दिया मुझे, मदहोश नैनों से जाम पीना सीखा दिया है मुझे, जब छुआ था यूँ ही अपने हाथों से मुझे तूने, उसी वक़्त से रातों में जागना सीखा दिया है मुझे।
अब तक तो जिंदगी जिए जा रहा था बेवजह, खुद ही खुद को समझा रहा था बेवजह, तेरे पास आने से इस दिल को सुकून तो मिला, नहीं तो दुनिया की भीड़ में खोये जा रहा था बेवजह। दिल के अरमान अब सारे बता दिए है मैंने, कहे अनकहे सारे जज्बात समझा दिए है मैंने,
सुनना चाहता हूँ मैं भी अब तेरे दिल की बात,
मेरे दिल के पैगाम तो पहुंचा दिए हैं मैंने।
By Kuldeep Kumar

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