बहारें
Updated: Jun 10, 2023
By Nitika Soin
लाख फरेब दे, लाख छिपाये कोई,
इश्क़ के साये से कहाँ बच पाए कोई।
वो हथेलिओं में भर के अपने चेहरे पे फेंक देता है,
कितनी अदा से बारिश की जान बचाये कोई।
न उतरा रंग न आँसुओं की लकीर ही दिखे,
इतनी बेरहमी से चाँद को न रुलाये कोई।
बहार को फिर लौट कर आने में वक़्त न लगेगा,
फूलों को तेरे बालों में सजाये कोई।
मैं आँखों में इंतज़ार भर के बैठी हूँ,
क्या पता वक़्त-बेवक़्त आ जाए कोई।
जिन लम्हों में ज़िन्दगी रक्स किया करती है ,
उन लम्हों को जल्दी से न गंवाए कोई।
By Nitika Soin

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