बस तुम्हारे देख लेने से
By Amit Sagar
मैं पूरी हो जाती हूँ
बस तुम्हारे देख लेने से
रोती आँखों से भी मुस्कुराती हूँ
बस तुम्हारे देख लेने से
तड़फती हूँ हर पल, बिन पानी मछली हो जैसे
और अगले ही पल सागर में डूब जाती हूँ
बस तुम्हारे देख लेने से
दिल में अरमानो का सैलाब लिए फिरती हूँ
पर होंठो के किनारे ही ठहर जाती हूँ
बस तुम्हारे देख लेने से
आँखों में तेरी मोहब्बत का तूफ़ान लिए चलती हूँ
पर एक पल में वहीं थम जाती हूँ
बस तुम्हारे देख लेने से
यूँ तो शख्शियत हमारी है, आसमानों से भी बुलंद
पर ना जाने क्यों जमीं पर बिखर जाती हूँ
बस तुम्हारे देख लेने से
By Amit Sagar

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