बस तुम मुझे अपना बनाए रखना......
By Sanchita S K Behera
काफ़ी लोगों से सुना है,
यूं ही किसी की बातों में,
कभी किसी के नए से इश्क़ में,
कभी खामोश बैठे उन लोगों से भी,
बिछड़े हुए अपने इश्क़ के बारे में बताते हैं,
हर कमी खामी गिनवाते हैं,
सवाल आता है फिर जहन मैं मेरे की इन्होंने ही तो उसे चुना होगा,
तब हर बात उसकी अच्छी बताई होगी,
उसकी कमियों में भी अच्छी बातें ढूंढी होगी,
कभी वो रूठा होगा तो उसे मनाया भी होगा,
पर आज हर बात पर उसे गलत बताते हैं।
आख़िर क्यों?
कोई हर बात में गलत हो यह ज़रूरी तो नहीं।
कल जो साथ थे, आज एक दूसरे से ही बेवफा से लगते हैं।
आज वो कुछ खुद से ही खफा खफा से लगते हैं।
क्यूं साथ नहीं अगर पुछा जाए इनसे,
एक बात जवाब सी सजी होती है इनके जुबान पर,
की तुम नहीं समझोगे।
यह मोहब्बत की बातें हैं,
सिर्फ मोहब्बत करने वाले ही जानते हैं।
हां, सही कहते हैं काफ़ी हद तक,
क्योंकि उन्होंने ना तो कभी मुझे किसी के बारे में ज़िक्र करते सुना है,
ना ही मुझे किसी के फ़िक्र में ढलते देखा है।
बातें इस ज़माने की सुन फिर खयाल तुम्हारा आता है,
तुम्हारे बारे में तो मुझे हर किसी को बताना हैं,
पर तुम्हारा नाम सरेआम किए बगैर।
अपने मोहब्बत के बारे में तो हर कोई बताता हैं यहां,
यहां हर कोई अपने इश्क़ का नाम लेता हैं, उसे अपना खास बताता हैं,
उसके साथ गुज़रे वक्त की तस्वीरें फिर ज़माने को दिखाता है।
मुझे बस तुम्हें इन चीज़ों के मायनों में नहीं तोलना हैं,
मैं नहीं बताना चाहती तुम्हारे बारे में वो बातें जो शायद कल जाकर ढल जाए।
मैं तो बताना चाहती हूं तेरे हर नादानी के बारे में,
तेरे उस बचपने के बारे में,
तेरे गुस्से से लेकर तेरा बात बात पर मुझे डांटने के बारे में,
तेरा जो हर खयाल हैं मेरे बारे में,
वो हमारा जिस्मों से बढ़कर रूह तक जानने के बारे में,
उन बेहिसाब बातों के बारे में जो हम यूं एक दूसरे से घंटों तक करते हैं
मानो पहले कभी किसी से बातें ही ना की हो।
सवेरे और शाम तो बस नाम के है,
बातों में और खयालों में आना जाना तो कभी ठहरता नहीं हमारा।
मुझे तुम्हें तस्वीरों से ज्यादा अपने खयालों में रखना हैं।
तुम्हारा नाम ज़माने से कि गई बातों से ज्यादा,
खुदा से की गई दुआओं में रखना हैं।
यकीन नहीं करते अब कोई ना की ऐसे भी कोई किसी को चाहता होगा।
पर एक बात यकीन से तुम्हे कहती हूं,
की जब कोई हमारे बारे में सुनेगा तो उसको भी मोहब्बत पर यकीन होने लगेगा,
फिर कभी जो वो हमें साथ देखेगा,
तो रह रह कर वो भी सजदों में ये दुआएं करने लगेगा कि
क्या हुई खता आख़िर हमसे की ऐसा प्यार हमें नसीब नहीं हुआ।
बस तुम मुझे अपना बनाए रखना,
क्योंकि मेरा होना – ना होना भी तुझी से हैं।
By Sanchita S K Behera

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