बस तुम नहीं।
By Dr.Trupti Upadhyay
यादें है, बाते है,शिकवे है, बस तुम नहीं।
हर फूल को खुशबु का साथ है,बस तुम नहीं।
रोज सुबह के साथ पंछी आते है,बस तुम नहीं।
रोज शाम मिलने की आस लाती है, बस तुम नहीं।
हर रात चाँद और चांदनी से सजती है, बस तुम नहीं।
आपनो की भीड़मे हम तन्हा है, बस तुम नहीं।
कहने लगे है लोग कुछ बदला नहीं,
लेकिन अब हम ही हम नहीं क्युकी बस तुम नहीं।
By Dr.Trupti Upadhyay

Comments