बलिदानों की बलिवेदी पर
By Kuldeep Kumar
बलिदानों की बलिवेदी पर जो अपना शीश टिकाते हैं,
खून रगों में बहता खुद का जो सरहद पर बहाते हैं,
जीते रहें हम ख़ुशी से इसलिए जो दुश्मन से भिड़ जाते हैं,
कतरा कतरा दे कर वो वीर शहीद कहलाते हैं।
खुली हवा में लेकर साँस जो आज़ादी आज़ादी चिल्लाते हैं,
देश की जनता के पैसों से जो पढ़ते हैं रोटी खाते हैं,
गाली देते देश को जिनको समझ इतनी नहीं आती है,
वो वीर जो सरहद पर खड़े, तुमको भी तो बचाते हैं।
तुम्हारी तरह भी घर है उनका परिवार भी तो होता है,
जाता है जब वो सरहद पर पूछो माँ का दिल कितना रोता है,
करते कर्तव्य अपना पूरा जब लिपट तिरंगे में जाता है,
बाप की आँखों से आँसू नहीं बस गर्व छलकता होता है।
तुम क्या जानो आज़ाद मुल्क में आज़ादी मांगने वालों,
सरदार पटेल के श्रेष्ठ भारत के तुम टुकड़े मांगने वालों,
हर घर से जिन दिन वीर सपूत सरहद पर पहुँच जायेगा,
ढूंढे से भी शायद मिल नहीं पाओगे तुम खैरात मांगने वालों।
By Kuldeep Kumar

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