बराबर रखो
By Ayushmaan Vashishth
धरती माँ के पवन चरणों में
सती-सावित्री की प्रतिभा रखो
झांसी की रानी और दुर्गा का बलिदान
गीता-वेदों की शिक्षा साथ रखो
हमें भी अपने बराबर रखो।
जब राधे-राधे से बनती है सुबह की नमस्कार
घनश्याम की बात भी होती, उसके संसार के साथ
तो आज भी अपनी मर्यादा रखो
हमें भी अपने बराबर रखो।
सीता का साहस जब करा सकता है लंका पार
जब माँ का हाथ पकड़ के किया जग-संसार
तो हमारी भी प्रतिभा पे भरोसा रखो
हमें भी अपने बराबर रखो।
पार्वती की शक्ति - काली की ताक़त
कम नहीं है लक्ष्मी की महिमा अपार
ग्रंथों की तो आस्था रखो
हमें भी अपने बराबर रखो।
जहां की संस्कृति में ही हो औरत का संचार
पुराणों से किया महिलाओं का जय-जयकार
तो हमें सिर्फ सुंदरता की मूरत का तकाज़ा न रखो
हमें भी अपने बराबर रखो।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
ज़रूरत न पड़े आगे इसकी, संसार को ये समझाओ
देश के लिए हमारी भी शहादत रखो
हमें भी अपने बराबर रखो।
By Ayushmaan Vashishth

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