बरखा रानी..!! यूँ बिन बताए ना आया करो
By Suchita Joshi
बरखा रानी हमेशा इस तरह
यूँ बिन बताए ना आया करो
वो दिल के कोने में संजोयी हुई
उनसे मिलने की धुंधली सी आस
फिर से ना जगाया करो
वो गुजरा जमाना,हंसी का ख़ज़ाना
बात बात पे मेरे रुठ जाने पर
उनका वो मासूम शक्लें बनाना
वो रूठने मनाने की हंसी यादें
फिर से ना दिलाया करो
वो यूँही हाथ में हाथ थामे
मिलों तक चलते ही चले जाना
साँझ ढलते ही उनसे बिछड़ने की
वो बोझिल सी विरह की अनुभूति
फिर से ना कराया करो
वो भीगी रातों के सन्नाटे में
उनके दिल की धड़कन को सुनना
वो उनके पास होने का एहसास
अपनी रिमझिम की झनकार में
फिर से ना कराया करो
वो उनका तुम्हारे साथ आने का वादा
विरह में उनसे मेरा झगड़ना ज़्यादा
यूँ तुम अचानक से आक़र
उनके भी आने के झूठे सपने दिखाकर
फिर से ना तड़पाया करो
एक अरसा हुआ उनको देखे हुए
उनको गले से लगाए हुए
यूँ पुराने लम्हों की यादें दिलाकर
मेरे दिल की धड़कनो को
फिर से ना बढ़ाया करो ।।
By Suchita Joshi

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