बनारस...
By Dr. Suboohi Jafar
यह काशी है, वाराणसी है,
यह विश्व की प्राचीनतम नगरी है,
ग़ालिब कहें, "हिंदुस्तान का काबा",
तो तुलसी के लिए "परमारथ की खान है"|
भारतेन्दु कहें, बनारसी लुच्चे, बे बिसवासी हैं",
"गलियों में पान की दुकान, है बनारस की शान", कहते बेढब बनारसी हैं,
यह नगरी है मोक्ष की, आध्यात्म की,
ज्ञान के अथाह सागर की|
यह नगरी है वेदों की, उपनिषद की,
बुद्धिजीवियों की, समाज सेवकों की,
महान गायक और कलाकारों की,
राजनीतिज्ञों की और वैज्ञानिकों की|
दिए हैं विश्व को इस धरती ने बहुमूल्य उपहार,
जिनके आगे तुच्छ हैं, हीरों के हार,
साहित्य और सभ्यता से भरपूर इसकी संस्कृति,
यूँ ही नहीं कहलाती ये, सर्वविद्या की राजधानी|
एक तरफ दशाश्वमेध घाट पे शाम की गँगा आरती,
तो दूसरी तरफ़ मणिकर्णिका घाट पे कोई माँ है किलसती,
यही इकलौता शहर है, जहाँ जीवन और मृत्यु साथ हैं चलते,
एक तरफ़ ज्ञान की बातें, तो दूसरी ओर चाय पे चर्चे|
है मशहूर पान बनारस, और यहाँ की गलियाँ,
माँ गँगा हैं, घाट हैं, और बनारसी साड़ियाँ,
स्थापना की, इस नगरी की, भगवान शिव ने,
है इतिहास ४००० वर्षों का, बीत गई कई पीढ़ियाँ|
यही नगरी है जन्म स्थल गौतम बुद्ध का,
नगरी है यह तुलसीदास की और हुए यहाँ कबीरा,
पतंजलि, धन्वन्तरि की भी यही है कर्म भूमि,
है यही महाभारत रचयिता, वेद व्यास की जन्म भूमि|
यह शहर है डूबा मन्त्र में, गँगा नदी के जल में,
शंख के शंखनाद में, गौ माता के आशीर्वाद में,
सांझ के समय गोधुली बेला के अद्भुत दृश्य में,
तो घाट पे रखी तुलसीदास की खड़ाऊँ में|
वो घुमावदार गालियाँ, वो भुलक्कड़ रास्ते,
"नियरे लउकत हौ" कह कर घंटों यूँ ही घुमाते,
दशाश्वमेध घाट पे गायत्री मन्त्र की गूँज,
हाथजोड़करेंभगवानकीआरती, होजाएँमन्त्रमुग्ध|
By Dr. Suboohi Jafar

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