बनके बस तू निडर, जीत की और चल
Updated: Nov 18, 2022
By Ketan Phadke
जब तू अपनी राह चुनेगा मुश्किलें खड़ी होंगी, मंज़िल के इस रास्ते में मेहनत तो बड़ी होगी, आँधी तूफ़ान भी आये तू बस रह अटल, बनके बस तू निडर, जीत की और चल… तेरी मंज़िल हमेशा तुझे पता नही होगी, तेरी राह हमेशा फूलों से सजी नही होगी, खून से सने पैर भी हो तू मन में बन अचल, बनके बस तू निडर, जीत की और चल…
ये दुनिया हमेशा तेरे साथ नही होगी, तुझे गिरता देख वो मन से ख़ुश भी होगी, नज़रअंदाज़ करके बस तू लिख अपना कल, बनके बस तू निडर, जीत की और चल… अतीत की बुरी यादें अब तुझे भुलानी होगी, दिल में तेरे आज नयी उम्मीद जगानी होगी, भूल जा तू बीते हुए कल के सारे छल, बनके बस तू निडर, जीत की और चल…
By Ketan Phadke

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