बदलाव
By Jyoti Singh
तुम,
अब पहले जैसे नहीं रहे
कुछ बदल से गए हो |
बहुत मेहनत की मैंने,
तुम्हें सुधारने के लिए,
एक अच्छा इंसान बनाने के लिए,
तौर - तरीके सिखाने के लिए
बहुत टोकना पड़ा,
बहुत समझाना पड़ा,
तुम्हारी बेकार - सी तरकीबों से,
कहां कुछ होता था
इसीलिए हर बार,
अपना तरीका बताना पड़ा
तुम्हें इतना टोका,
तुम्हें इतना समझाया,
कि अब तुम्हारी,
अपनी कोई सोच ही नहीं है
अपनी कोई राय ही नहीं है
जो ऐब मैंने बाहर निकाल फेंके थे,
उसमें तुम भी कहीं चले गए हो
तुम,
अब पहले जैसे नहीं रहे
कुछ बदल से गए हो
अब तुम बिल्कुल ठीक हो,
बिल्कुल वैसे, जैसा मैं चाहती थी
बिल्कुल वैसे, जैसा सब चाहते थे
मानो जैसे कोई बीमारी थी,
कोई कमी थी,
जो अब पूरी हो गई है
फिर भी तुम,
कुछ अधूरे से हो गए हो
तुम,
अब पहले जैसे नहीं रहे,
कुछ बदल से गए हो
अब क्यूं तुम्हारी आंखों में,
वो चमक नहीं दिखती?
अब क्यूं तुम्हारी बातों में,
वो खुशी नहीं झलकती?
ऐसे तो तुम ठीक लगते हो,
हर काम सलीके से करते हो,
ना कोई ग़लती करते हो,
ना कभी लड़ाई करते हो
इतने सालों में, पता नहीं क्यूं
तुम कुछ चुप से हो गए हो
हां ! तुम,
अब पहले जैसे नहीं रहे,
कुछ बदल से गए हो
अब तो मुझे,
तुम कहीं दिखते ही नहीं,
मुझे तो बस मैं ही दिखती हूं,
ख़ुद में भी,
और तुम में भी,
तुम तो अब कहीं भी नहीं हो
आख़िर क्यों?
तुम अब पहले जैसे नहीं रहे
आख़िर क्यों ?
तुम अब बदल से गए हो
By Jyoti Singh

Comments