बदला व्यवहार
By Ateet Maurya
आज कल ख्याली जमीन पर,
शीश महल बनाया जा रहा है,
यहाँ अफरा तफरी का दौर है,
ऊँट करवट बदलने जा रहा है,
कौन कितने पानी में,पता है,
सवाल अब पुछा जा रहा है,
वहाँ पानी में जाने के बजाय,
पानी ही बढ़ाया जा रहा है,
सवाल हमारा-तुम्हारा नहीं है,
ये गणना गणित से हो रहा है,
इसका और उसका कितना है,
चारों ओर बताया जा रहा है,
सोचने वाली बात इतनी सी है,
शून्य को कहाँ लाया जा रहा है?
या सीधे-सीधे कह दिया जाय,
थोड़ा सा मुर्ख बनाया जा रहा है,
किसने क्या कर लिया है,अबतक?
पुँछ गलतियाँ छिपाया जा रहा है,
खुद के लिए सोचने से बरी हो गये,
अचानक अपना बनाया जा रहा है,
नीम में अब गजब सी मिठास है,
कड़वाहट भुलाया जा रहा है,
अच्छा है....मगर भूलना नहीं,
मौका है, जो भुनाया जा रहा है।
By Ateet Maurya

Comments