बच्चों जैसा
By Harjinder Singh
क्या बताऊं मैं जिंदगी में क्या-क्या नहीं हुआ
पर जो होना था जरूरी,
बस वही नहीं हुआ
मुझको शिकायत रही खुद से ये हमेशा,
कहीं मैं बुरा नहीं हुआ
कहीं अच्छा नहीं हुआ
एक शख्स है जो रुठा हुआ है मुझसे
वो मेरा नहीं हुआ, मैं किसी का नहीं हुआ
इतने मुश्किल हालातों में लोग खुदकुशी कर जाते हैं
मेरी हिम्मत देखो यार मैं तो पागल भी नहीं हुआ
मेरी इस खामोशी पर खौफजदा हैं यार मेरे
वह मुझ को हिम्मत देते हैं कहकर “हटो यार तुमको कुछ नहीं हुआ”
जरा जरा सी बातों पर अब भी बच्चों जैसा रो देता हूं मैं
मेरी मां कहती है सबसे “यह लड़का बड़ा नहीं हुआ”
किसी को भूलना था शहर छोड़ कर जाना था मुझको
मेरा यह आखरी ख्वाब है जोक भी पूरा नहीं हुआ।
By Harjinder Singh

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