बच्ची थी
By Priya Diwan
बैठी थी मैं अपने सारे गमों को छुपाए,
हाल क्या है मेरा कोई जान ना पाए।
चाह तो दिल खोल कर चिल्लाने की थी,
पर हालत मेरी बेबसी की थी।
समझाना मुश्किल था लोगों को,
जो मैं खुद भी नहीं समझ पा रही थी।
सब सह कर और देखकर हैरान थी,
मेरे अपनों को ही मुझ पर दया ना थी,
उस वक्त मैं महज़ एक बच्ची थी।
By Priya Diwan

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