बगावत
By Rajat Bhadoria
नज़रें मिलती हैं सबके सामने पर बात नहीं होती,
अब हमसे राज़-ए-इश्क़ की हिफाज़त नहीं होती!
पूछते हैं लोग मेरे बदले हुए मिजाज़ का ही हाल,
अब इस बात के आगे और कोई बात नहीं होती!
इक मैं हूँ, इक तुम हो और बेहिसाब ख्वाहिशें हैं,
और इक ज़माना है जिस से बगावत नहीं होती!
By Rajat Bhadoria

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