बंधन है यह संस्कारों का
By Mona Mamtani
पर्व है यह कच्चे धागों का ,
बंधन मजबूत प्यार , विश्वास और सुरक्षा का |
आता हर बहन के मन मे विचार , भाई के दीर्धायु होने का ,
और भाई के मन में बहन की सुरक्षा का।
करती हर बहन आरती अपने भाई की ,
लेती सब कष्ट वार अपने अग्रज और अनुज की।
देता विश्वास भाई सदा उसके साथ रहने का ,
वचन लेता हर पल की सुरक्षा का।
बदल गया ज़माना , न बदला त्योहार ,
बहन बनी काबिल , मिला अधिकर्म सारा।
भाई ने भी कसम ली , न देखेगी बहन अब रास्ता किसी का।
हर मंज़िल को छू ले तू ,पार करले हर पडाव।
हूँ तेरे साथ मैं खड़ा , प्रण है यह तेरे भाई का।
सुरक्षा नही पहचान है अब।
समानता का एहसास है अब।
न भूले अपनी जड़ों को अब।
यह बंधन कच्चे धागों का संस्कार हमारा है अब।
हाँ , बंधन यह कच्चे धागों का संस्कार हमारा है अब।
By Mona Mamtani

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