फूल हरसिंगार के
By Aditya Jha
फिर आया माह आश्विन
खिले फूल हरसिंगार के ।
उद्भासित दिग दिगंत ,
शशिकर के आगोश में।
झूमे तीक्ष्ण पत्ते हरे -
मालिन के पद चाप से,
नींद खुले भिनुसार के । .......
श्वेत पीताभ गुच्छ ,
शारदीय नवरात्र में ।
गंध आध्यात्मिक भरे -
वसुधा को चूम गई ,
दिनकर शर प्रहार से । ........
तिरोहित इक रात्रि में ,
कुछ ईश कंठ हार बने ।
कहीं सजे गजरे -
हर्षित लता गुल्म ,
अनोखे अभिसार से ।
फिर आया माह आश्विन
खिले फूल हरसिंगार के ।
By Aditya Jha

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