फुर्सत
By Amit Kumar
तुम सोच रहे हो जो अभी
फुर्सत...कब हुई या होगी
एक वेहम है मन का
ये ना कभी थी और ना होगी...
तब कुछ और थी अब कुछ और होगी
बात वही पर वज़ह कुछ और होगी
अपने वादे भी झूठे लगने लगेंगे
पर फुर्सत ...वो शायद कभी ना होगी
कभी जरूरत रही अब बेवजह लगी होगी
याद यूँ अपनों की कम हुई होगी
पल की कमी या अपना समझने की
ये सोचने की भी फुर्सत...शायद ना रही होगी
क्योंकि...फुर्सत
एक वेहम है मन का
ये ना कभी थी और ना होगी...
By Amit Kumar

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