फिरता रहता हूं
By Chanchal Sharma
पल-पल मरता हूं
तुझसे नहीं कहता हूं
बस फिरता रहता हूं,
अक्सर राहों पर !
जहां होकर गुज़री याद
जब बन के बिगड़ी बात
वो कितनी खौफनाक रात
बस फिरता रहता हूं,
अक्सर उन राहों पर !
कितना बेचैन होकर
पकड़ लिया था खो कर
बहुत तरसा था रो कर
बस करता रहता हूं ,
अक्सर उन राहों पर !
इतना तन्हा सब
जैसे रूठा रब
कैसे टूटा सब
बस फिरता रहता हूं ,
अक्सर उन राहों पर !
अरसा बीता हुआ
दामन भीगा हुआ
मौसम जीता हुआ
बस फिरता रहता हूं,
अक्सर राहों पर !
By Chanchal Sharma

Comments