फिर मुझे क्या परेशानी है
By Poonam Saroj
फिर मुझे क्या परेशानी है
हर दिल में कोई न कोई दर्द छुपा है
फिर मेरा दर्द कौन सा किसी से जुदा है
सबकी एक जैसी ही कहानी है
फिर मुझे क्या अलग परेशानी है।
वही परिवार वही संसार है
कुछ यूं ही फैला सबका विस्तार है
वही समाज वही रीति-रिवाज है
फिर मुझे क्यों इन सबसे एतराज़ है।
कमी किस में है ? मुझ में! या फिर
यह ज़माना ही खराब है।
यहां हर किसी का अपना ही एक मिज़ाज है
फिर कैसे कहूं कि मुझमें कुछ खास है।
कुछ ऐसी ही सबकी जिंदगानी है
फिर मुझे क्या अलग परेशानी है।
By Poonam Saroj

Comments