फरेबी
By Ishika Morolia
कोई उसके शहर जाए, तो ज़रा उसे बताए,
दो पल उस संग बैठे, थोड़ा प्यार उसे सिखाए,
वो कहता फिरता है, महबूब ने छोड़ दिया,
कोई मेरा दिल ले जाए, ज़रा आईना उसे दिखाए!
वो पुराने फूल मसल कर, नई कालियाँ लेता है,
लापरवाही के मोड़ से, गैरजिम्मेदारी की गलियां लेता है,
महफ़िल की खुशी को, दाँव लगा दिया किसी का सुकून,
वो मुझे फरेबी करार कर, खुद को तस्सल्लियाँ देता है!
By Ishika Morolia

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