फ़ैसला
By Zeeshan Sharique
कोई ये फ़ैसला कैसे करे की उसे भूल जाना है,
ये भी तो है मुमकिन की उसे लौट आना है,
कोई कहता है के उसे याद रखना है मुश्किल,
कोई कहता है की उसे भूल जाना है मुश्किल,
कोई अगर मुझसे पूछे तो बस इतना ही कहूं,
जिनका लौटना हो नामुमकिन, उनकी यादों को सजाए रखना है मुश्किल,
जिंदगी में जो भी आया वो हर शख्स है प्यारा,
क्या हुआ अगर वो है औरो से थोड़ा ज्यादा न्यारा,
प्यारे लोगो से जुदा हो कर जब हम जी सकते हैं,
फिर जो है सबसे दिलकश उस से बिछड़ कर क्यू मरने लगते हैं?
By Zeeshan Sharique

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