प्रेम - संवाद
By Saurav Suman
राधा राधा सब भजे मोहन कहे ना कोई,
बिन मोहन राधा कहा जग से पूछो कोई....
( राधा - कृष्ण संवाद )
करके ठिठोली कान्हा संग
सभी गोपियां मोहित होती है,
सुन लो नंद के लाल कान खोल के
होंगी दीवानी लाखों तुम्हारी
पर सच्ची वाली, सिर्फ कीर्तिदा की नंदिनी है....
देख समर्पण मीरा का
राधा क्यों विचलित होती है,
भला भक्ति और प्रेम के मापन के लिए भी कोई तुला होती है...
ना चलाओ यूं शब्दों के बाण प्रिये
"मैं सिर्फ तुम्हारा हूं" सुनकर
अब थक गए हैं कर्ण प्रिये,
मैं माँगती नहीं, पर तुम देना चाहो साक्ष्य अगर तो कह दो हृदय के हर कोने में राधा है... वरना मान लुंगी मैं कि
तुम्हारी अधरों पर सिर्फ राधा है
वो भी आधा आधा है.....
मैं सूर्य तुम रोशनी मेरी, मैं बलवान तो तुम शक्ति हो फिर भी लेना चाहो प्रमाण यदि
तो जमुना की तीरो से लेकर गोवर्धन के शिखर से पूछो, इससे भी ना हो संतोष अगर
तो मधुबन के हर फूलों से पूछो,
पूरी दुनिया दीवानी जिसकी, वो किसका दीवाना है...... होंगे प्रश्न लाखों तुम्हारे पर झुकाकर नैन,
करके मौन अधर जो सुनोगी तुम
तो हर प्रश्न का उत्तर कान्हा की राधा है.....
(प्रेमी-प्रेमिका संवाद )
जैसा प्रेम किया था राधा - कृष्णा ने, तुम वैसा प्रेम कर पाओगे क्या ?... अगर मिल ना सकी राधा तुम्हें
फिर भी उसके कान्हा बन पाओगे क्या?...
ना आदि होगा न अंत होगा प्रेम अपना इतना अनंत होगा
ये संयोग वियोग की बातें छोड़ो प्रिये,
है वचन, हर परिस्तिथि में प्रेम अपना जीवंत होगा.......
By Saurav Suman

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