प्रेम
By Pallavi Jawalkar
प्रेम ही तो है, किसी के ख्यालों में खो जाना और तन्हाई में मुस्कुराना
दिमाग लाख मना करें बात करने से, पर दिल का उसकी एक ना सुनना
हां, यह प्रेम ही तो है
मुझे तो हो गया है, तुमसे
क्या पता शायद, तुम्हें भी हो जाए मुझसे
दिल पर कोई जोर तो नहीं है, और मुझे भी इस बात का कोई ग़म नहीं है
न जाने किस डोर से बंध गया है दिल छुटाए नहीं छूटती
तुम्हारे ख्यालों में बिताए उन लम्हों की यादें मिटाएं नहीं मिटती
प्रेम ही तो है
जो मेरे दिल के रास्ते सिर्फ तुम तक जाते हैं
जो मेरे ख्यालों के धागे सिर्फ तुम तक जाते हैं
क्या कहूं, कैसे कहूं, लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं
तुम्हारे ख्वाबों में खो जाने पर लम्हें कम पड़ जाते हैं
आरज़ू दिल की बस इतनी है, तमन्ना दिल की बस इतनी है
कभी तो मेरे ख्यालों से निकलकर हकीकत में आओ
कभी तो मेरे ख्वाबों से निकलकर इस सरजमीं पर आओ
निगाहें तलाशती है सिर्फ तुम्हारी निगाहों को
बड़ी बेसब्री से निहारती है सिर्फ तुम्हारी राहों को
इंतज़ार है तुम्हारा, सिर्फ तुम्हारा
कभी तो ख्वाबों से हकीकत में आओ
By Pallavi Jawalkar

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