प्रिय मां।
By Samya Khan
क्या पता था , अब इन हवाओं में बहेंगी आप,
क्या पता था अब इन आवाजों में बसेंगी आप।
क्या पता था छोड़ कर चली जाएंगी आप
भेजा भी है उसने , बुलाया भी उसने,
फिर भी यह दिल छीन लेना चाहता है आपको रब से।
तड़पन मेरी कौन समझेगा?
कौन अच्छे बुरे में मेरे साथ रहेगा?
जी करता आपके पास आजाए,
रूह बन कर आपके साथ रह जाए ।
इस मासूम दिल को कैसे समझाया जाए,
बिना आपके इस जहां में कैसे रहा जाए।
By Samya Khan

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