प्रार्थना
By Mohan Jha
जय यशोमति सुत देवकीनन्दन हरि जन मंगलकारी।
जय यदुनन्दन जय माधव हरि जन मनरञ्जनकारी।।
अवश अपन मन स्ववश स्वकृत नहि संकुल ताप दुखारी।
हिअ हारल हम अघ हतभागी हेरहु कृष्ण मुरारी।।
किंकर कातर सजलनयन नत जलजनयन गिरिधारी।
कलुष तिमिर हरु हे करुणाकर केशव कुञ्जविहारी।।
अशरण-शरण शरण दिअ' सत्वर पुण्य सुदर्शनधारी।।
अन्त करू प्रभु दुख अनन्त हे मोहन मुरलीधारी।।
By Mohan Jha

Comments