प्रदूषण
By Dr. Suboohi Jafar
प्रदूषण शब्द का उद्धरण संस्कृत शब्द प्रदूषणम् से हुआ है,
दूषक पदार्थों के कारण प्राकृतिक संतुलन में उत्पन्न होने वाले दोष को दर्शाता है।
पर्यावरण और जीव जंतुओं को हानि यह पहुँचाता है,
सभी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव यह डालता है।
2 दिसंबर प्रदूषण नियंत्रण दिवस के रूप में उदघोषित है,
प्रदूषण के चलते आज की युवा पीढ़ी कुपोषित है,
नहीं मिलती स्वच्छ वायु भी श्वास लेने के लिए,
मानसिक तनाव दर में भी हुई वृद्धि है।
आज के युग में कोई भी वस्तु शुद्ध रूप में प्राप्त नहीं है,
वायु, जल या हो फल सब्ज़ियाँ, सभी में मिलावट है,
शीघ्र प्रगति की होड़ में, मानवता कहीं धूमिल हो चली है,
सरल और ग़लत मार्ग पे चल कर, सबको बनना साफ़ल्य है।
समस्त संसार में प्रदूषण का घोर प्रहार है,
कहीं जल की समस्या के कारण सूखे और भुखमरी की मार है,
कहीं वायु प्रदूषण का संकट, कर रहा सबको बीमार है,
जनसंख्या वृद्धि के कारण, छिन गए सबके अधिकार हैं।
हे मनुष्य! चेत जाओ, अब भी समय है,
आदर करो प्रकृति का, वरना अंत निश्चय है,
हो स्वयं भी जागरुक, और इसकी मुहिम भी तुम्हारा कर्तव्य है,
रखो स्वच्छ वायु, धरती और जल, प्रतिमाह वृक्षारोपण अनिवार्य है।
By Dr. Suboohi Jafar

Comments