प्रतिक्षा में सवाल
By Abhilasha Purohit
सोचती हूँ कई बार ये भी मैं
कि क्या तुम भी मेरा इंतेज़ार इतनी ही शिद्दत से कर रहे हो जैसे मैं..
क्या तुम भी मंदिर जाते हो मेरी तरह ??
मांगने को मेरा साथ
क्या तुम्हारी प्रार्थना में शामिल हूँ मैं कही?
क्या तुम भी करते हो वो जतन जिसे बताते हैं पंडित कई..
क्या तुम भी गाय को चारा फैकते हो या कुत्ते को घी लगी रोटी बनाकर खिलाते हो?
क्या तुम भी धर्म के नाम पर कभी-कभी मुझसे मिलने आते हो कहीं..
सोचती हूँ कि क्या तुम भी मेरी तरह मेरे लिये यूँ बौराते हो
क्या तुम भी कभी भी कही भी मेरे संग के सपने में खो जाते हो
क्या तुम भी मेरी तरह 2 कप चाय की बैठकर पीते हो
जिसके हर घूंट के साथ जैसे मैं शब्द जोड़ती हूँ तुम पर
क्या तुम भी मुझ पर वैसा कुछ लिखते हो??
और बताओ जान!!
क्या तुम भी मंदिर में मिला प्रसाद दो हिस्सों में करके खाते हो
क्या तुम भी मेरे बिन यूँ हंसी हंसी में अपना दर्द छुपा
जाते हो??
क्या तुम भी मेरे बारे में सोचकर खुद पर इतराते हो
क्या तुम भी मुझ पर ऐसे ही अकेले मे चिल्लाते हो??
क्या तुम भी मुझे रूठा देख फिर मनाने आते हो??
क्या तुम भी कुछ खाने से पहले मुझे खिलाते हो??
क्या तुम भी किसी और से आँख नहीं मिलाते हो
By Abhilasha Purohit

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