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प्रकृति का इशारा

May 3, 2023
2 min read

By Swati Sudha


इंसानों की धरती पर कोरोना का आगमन,

ईश्वर का जरूर है कोई न कोई प्रयोजन ,

क्या उसने की थी धरती कभी इंसानों के नाम,

तब फिर सारे संसाधन कैसे हो गए इंसानों के गुलाम ?


सजीवों की शुरूआत हुई एक कोशिका से,

धीरे- धीरे बढकर जिसने लिया इंसानों का रूप,

हमने गर्व से कहा उसे सबसे उन्नत प्रजाति,

जिसने अस्त व्यस्त कर दी बाकि सभी प्रजातियों की उन्नति।


सजीवों का ये हाल तो निर्जीवों का क्या कहना,

नदी,पहाड,झरना, खेत सभी बन गए उसके हाथ का खिलौना,

पेड़ों को उखाड़ फेंका, नदियों का रास्ता मोड़ दिया,

हवाओं को भर दिया जहरीली गैसों से,पहाड़ों में किया बमों का धमाका।


प्रचारित ये किया गया कि हमने प्रकृति को जीत लिया,

नई तकनीक से हमने मानव श्रम को बचाया,

कम जगह में ज्यादा अन्न उपजा लोगों का पेट भरा,

बढती जनसंख्या के लिए रंग-बिरंगी चीजों से बाजार भर दिया।



यह भी कहा गया कि हमने बीमारियों को समूल नष्ट किया,

कई जीवाणुओं और विषाणुओं को प्रयोगशाला में कैद कर लिया,

लोगों की उम्र बढाई, उन्हे बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार किया

उन्हे मिट्टी से अलग कर सफाई और सलीके से रहना सिखाया।


और यहीं से इंसान ने हारना शुरू किया,

प्रकृति से अलग हो खुद को कमरों में कैद कर लिया,

वो भूल गया कि बक्से में बंद होना है मौत की शुरूआत?

शांति चाहिए तो जाना होगा अपनी प्रकृति माँ के पास।


कोरोना ने याद दिलाया तु नहीं है विजेता यहाँ,

एक छोटे से विषाणु ने तुझे भेस बदल- बदल कर हराया,

तो फिर तुने किसे हराया, किसके उपर परचम फहराया,

निरीह से जानवरों पर, निर्जीव संसाधनों पर।


वो जानवर और संसाधन भी हारे नहीं ,परंतु चेतावनी के रूप में बिखर गए,

जल,थल, नभ सभी प्रदूषित हो ,लगे इंसान को मुँह चिढाने ,

जिस डाल पर बैठना उसी को काटना ,लिखा तो किसी मानव ने

परंतु उसे समझकर आत्मसात करना ,अभी भी नहीं है उसके बस में।


तालाबंदी ने एक सीख दी थी ,जब विश्व में मशीनों ने किया था विश्वाम ,

धरती से मानो गंदगी की परत छंट गई ,नदियाँ होने लगी निर्मल ,

धुंध हुई कम, वायु हुई प्राणदायिनी, सुनाई देने लगे पक्षियों के स्वर ,

प्रकृति ने किया इशारा, सब कुछ हो जाएगा संतुलित,अगर हम न रखे जरूरतें अधिकतम ।।


By Swati Sudha




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