प्रकृति और हम
Updated: Dec 1, 2022
By Nidhi Gupta
प्लास्टिक तुम क्यों हो फैलाते, धरती को भी धुएँ से नहलाते,
अभी तो कोरोना से हैं छूटे, बंद दरवाज़ों में थे दम सबके घुटे,
अब भी संभल जाओ तुम प्यारे, वरना देखो प्रकृति के नज़ारे,
जब वक़्त की करवट पलटेगी, क्या तब सबकी आँखें खुलेंगी,
सौ सुनार की, एक लुहार की, बात है ये बड़े पते की,
प्रकृति लेगी फिर बदले सारे, अब भी संभल जाओ तुम प्यारे|
By Nidhi Gupta

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