प्रकृति
By Ghan Shyam B Pai
होती है वह सभी की माँ
पर कोई उसे समझता नहीं
करती है वह सभी की पालन
जैसा न करता हमारा जीवन ।
आंख है हमें जो उसके आंसू ना देखें
कान है जिससे उसे सुन न पाए ।
उड़ता है सूरज तो होता है दिन
होगा वह नाच जब उठेगा चाँद
बादल के बिना दिखता है नीला
कभी है श्याम कभी जैसे ज्वाला ।
है बरसाती ठंडी सी बारिष
जब होती है यहां गर्मी की साजिश
और चट्टानों के त्याग
भूजाती है भूख की आग ।
और देती है बहुत कुछ भी
पर कुछ भी नहीं मांगती कभी
आदर करें उस माता की
नाम है जिसकी प्रकृति ।
By Ghan Shyam B Pai

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